दिल्ली पुलिस में तो भाई उनकी सारी बात ठीक
कोई कवि समेलन हो और उन्हें नही बुलाया तो
समझ लो । बड़ेबड़े बदमाश जब जबान नही खोलते
तो इनकी एक कविता सुनवा दो अगली पिछली
सारी चोरी कबूल कर लेगा अपने इसी रॉब के चलते
कई पुस्तक भी प्रकाशित करा चुके हद तो तब हो
गयी जब एक ऐसे लेखक जिस की नजाने कितनी
पुस्तक प्रकाशित हो चुकी उन पर आरोप लगा
दिया ये मेरी रचनाये चुराते हे ।इससे 1 फायदा तो
हुआ बड़े लेखको की नज़र में आ गये मुझे भी एक
दो लेख भेजे हम ने गलती से प्रकाशित भी कर
दिए । बस फिर क्या था हमे आदेश दे डाला हमे
किस लेखक के लेख छपने हे किस के नही सारे
लेखक चोर हे बस आप हमारे लेख छापो अगर
पत्रिका चलानी हे हम ने संपादक की पावर दिखा
कर अपनी पत्रिका से बहार का रास्ता दिखा दिया
जब उनकी कविता नही छापी तो हमे मेल आई
।अगर मेरी अनुमति के बगेर मेरी कोईभी रचना
छापी तो क़ानूनी करवाही की जायगी।
धन्य हो महराज ऐसे लेखको से भगवन
बचाए अगर आप दिल्ली के इस लेखक
का नाम जानते हो तो ज़रूर बताये
ओर ऐसे लेखको से बच कर चले














