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Monday, February 12, 2018

नज़रिया

अमेरिका मे जब एक कैदी को फॉसी की सजा सुनाई गई तो वहॉ के कुछ बैज्ञानिकों ने सोचा कि क्यों न इस कैदी पर कुछ प्रयोग किया जाय ! तब कैदी को बताया गया कि हम तुम्हें फॉसी देकर नहीं परन्तु जहरीला कोबरा सॉप डसाकर मारेगें !
और उसके सामने बड़ा सा जहरीला सॉप ले आने के बाद कैदी की ऑखे बंद करके कुर्सी से बॉधा गया और उसको सॉप नहीं बल्कि दो सेफ्टी पिन्स चुभाई गई !
और क्या हुआ कैदी की कुछ सेकेन्ड मे ही मौत हो गई, पोस्टमार्डम के बाद पाया गया कि कैदी के शरीर मे सॉप के जहर के समान ही जहर है ।
अब ये जहर कहॉ से आया जिसने उस कैदी की जान ले ली ......वो जहर उसके खुद शरीर ने ही सदमे मे उत्पन्न किया था । हमारे हर संकल्प से पाजिटीव एवं निगेटीव एनर्जी उत्पन्न होती है और वो हमारे शरीर मे उस अनुसार hormones उत्पन्न करती है ।
75% वीमारियों का मूल कारण नकारात्मक सोंच से उत्पन्न ऊर्जा ही है ।
आज इंसान ही अपनी गलत सोंच से भस्मासुर बन खुद का विनाश कर रहा है ......
अपनी सोंच सदैव सकारात्मक रखें और खुश रहें
25 साल की उम्र तक हमें परवाह नहीँ होती कि "लोग क्या सोचेंगे ? ?
50 साल की उम्र तक इसी डर में जीते हैं कि " लोग क्या सोचेंगे ! !
50 साल के बाद पता चलता है कि
हमारे बारे में कोई सोच ही नहीँ रहा था ! !

Tuesday, December 23, 2014

मुसलमानों के अच्छे दिन.

आप सभी से मेरा निवेदन हे की आप यह लेख आखरी लाइन तक पढ़े 



आज कल मुसलमानों को घर वापसी का मोका हमारे बहुत ही समझदार नेता दे रहे हे बहुत अच्छी बात हे चलो इसी बहाने कुछ गरीब मुसलमानों का भला हो जाये आधार कार्ड ज़मीन के पट्टे कुछ आर्थिक मदद समाज में साथ रहने का मोका इज्ज़त से देश में रहने की आज़ादी शक की नजर से देखने वाले फिर तो कुछ रहेम करेंगे कितना अच्छा लगेगा जब उन लोगो को जो गिरी हुई नज़र से देखते थे वो अब उनकी   आँखों के तारे होंगे फिर वो लीग उन मंदिरों में भी जा सकेंगे जहाँ अब वो नही जा सकते मोलाना कल्बे सादिक ने भी कह  दिया  की अगर गरीब मुसलमानों को हिन्दू बनाकर उन्हें गरीबी से निजात दिलाते हे तो किसी मुस्लमान को कोई एतराज़ नही होना चाहिए हिन्दू धर्म में वापसी कुछ लोगो को बेहतर ज़िन्दगी दे इस से अच्छा मेरी नज़र में कुछ नही ... मगर इस बात की क्या गारंटी हे ये लोग खुश  हाल हो जायंगे घर वापसी कराने  वालो को चाहिए वो इतना तो करे इन के  बेंक में खाता खुलवाकर इन के खाते में कम से कम ५० लाख रूपये जमा करा दे ताके वो घर वापसी के बाद धर्म के काम  में भी लगे रहे जो समय हमारे महान नेता इस कम में लगा रहे हे वो किसी और  नेक काम में लगा सके सोचो हिन्दू धर्म का २० साल बाद क्या होगा ,,आप धर्म बदल सकते हो मानसिकता नही सब से बड़ी परेशानी  धर्म नही अज्ञानता हे गरीबी हे शिक्षा की कमी हे देश के प्रति सम्मान की बात हे ...अगर हम देश के बारे में सोचे और इन लोगो को और कुछ नही २०साल जो पैसा हमारे नेता इन्हें घर वापसी में लगा रहे हे इन्हें शिक्षित करने में लगा दे तो देशदुनिया  का नंबर १ देश होगा अमीर आदमी किसी भी धर्म का हो किसी भी देश का हो एक से दिखते हे उनके कपडे उनके प्र्फियूम उनके घर उनका लाइफ इस्टाइल एक सा क्यों होता हे ..फर्क नही पड़ता अमीर अमेरिका  का हो या बंगला देश का हो .. मेरे जेसा मुसलमान तो यह कहने में गर्व महसूस करता हे ...पहले देश फिर धर्म ...... क्या घर वापसी करने वाले बता सकते हें के मुस्लमान से हिन्दू बने लडको की शादी अपनी बेटियों से करा सकते हे ...क्या वो इन की साथ एक प्लेट में खाना खा   सकते हें क्या गरीबी से इन्हें निजात दिला सकते हे ...अगर नही तो इस ड्रामे को बंद करें .....एक बात याद रहे मुसलमान कभी नही बदल सकता ..मुसलमान हमेशा मुसलमान ही रहेगा ..........

Tuesday, May 6, 2014

सारे लेखक चोर हें


मेरे एक महान मित्र हे बहुत बड़े लेखक गीत कार 
एक्टर गायक के साथ राजपूत भी इससे भी बड़ी बात
दिल्ली पुलिस में तो भाई उनकी सारी बात ठीक
कोई कवि समेलन हो और उन्हें नही बुलाया तो
समझ लो । बड़ेबड़े बदमाश जब जबान नही खोलते
तो इनकी एक कविता सुनवा दो अगली पिछली
सारी चोरी कबूल कर लेगा अपने इसी रॉब के चलते
कई पुस्तक भी प्रकाशित करा चुके हद तो तब हो
गयी जब एक ऐसे लेखक जिस की नजाने कितनी
पुस्तक प्रकाशित हो चुकी उन पर आरोप लगा
दिया ये मेरी रचनाये चुराते हे ।इससे 1 फायदा तो
हुआ बड़े लेखको की नज़र में आ गये मुझे भी एक
दो लेख  भेजे हम ने गलती से प्रकाशित भी कर
दिए । बस फिर क्या था हमे आदेश दे डाला हमे
किस लेखक के लेख छपने हे किस के नही सारे
लेखक चोर हे बस आप हमारे लेख छापो अगर
पत्रिका चलानी हे हम ने संपादक की पावर दिखा
कर अपनी पत्रिका से बहार का रास्ता दिखा दिया
जब उनकी कविता नही छापी तो हमे मेल आई
।अगर मेरी अनुमति के बगेर मेरी कोईभी रचना
छापी तो क़ानूनी करवाही की जायगी।
धन्य हो महराज    ऐसे लेखको से भगवन
बचाए   अगर आप दिल्ली के इस लेखक
का नाम जानते हो तो ज़रूर बताये
ओर ऐसे लेखको से बच कर चले 

संगीत मेरी इबादत है:- ममता श्रीवास्तव

पाशर्व गायकी मे ममता श्रीवास्तव अब नया नाम नही है भोजपुरी और हिन्दी फिल्मों मे उनका खासा नाम है। पेशे से टीचर ममता श्रीवास्तव संगीत को एक ऐसे माध्यम के रूप में देखती है जिसके द्वारा वो इस समाज में कुछ योगदान दे सके। ममता मुंबई के आर वीटी विधालय मे बच्चो को संगीत सिकाती है। संस्कार उनके लिए बहुत महत्वपूर्ण है। उनका मानना है कि संगीत और सिनेमा समाज के अच्छे या बुरे बनने में बहुत असर डालतें हैै। उनके मुताबिक शिक्षिका होने के नाते वो गीतो एका चुनाव बेहद सजगता से करती है वो प्रसिद्व और पैसे के लिए कोई भी गाना नही गाती आकाशवाणी में वीहाई ग्रेड प्राप्त ममता श्रीवास्तव हाल ही में दिल्ली दूरदर्शन में एक शो के लिए आई डीडी 1 टीवी चैनल पर प्रसारित ईविनिंग लाइव शो में उन्होने इस्पेशल गेस्ट के तौर पर अपनी लिखी गजल और भोजपुरी लोगगीत गाये इसी मौके पर रउफ अहमद सिद्वीकी ने उनसे भोजपुरी गीतो और उनकी दिशा पर बात की प्रस्तुत है पूरी बात ।

आप मुख्यतः भोजपुरी गीत गाती है, जिसमें ज्यादा तर देवर भाभी और हल्के मूड के गाने होते है। गाने का चुनाव कैसे, करती हैः

मै हमेशा याद रखती हूॅ कि मै जो गाना गाउंगी उससे मेरे अपने बच्चे और स्टूडेटस जरूर सुनेंगे ऐसे में कलाकार के रूप में जिम्मेदारी है कि मै ऐसे गाऊ जिनसे समाज और बच्चो पर उसका बुरा प्रभाव न पडे इसके लिए चाहे मुझे साल मे 10 में से दो ही फिल्मो का चुनाव क्यू न करना पडे सफलता का रास्ता समझौते से नही पूरा करना चाहती इसके लिए मैने मडर 2 के एक गीत को ठुकरा दिया

ः- क्या बोल की वजह से ठुकराया आपने यह गाना --

 नही डायरेक्टर ने मुझे इसमें गाने का खुद मौका दिया था लेकिन कुछ परिस्थ्यिों ऐसी बनी की मुझे नल करना पडा 

संगीम में भोजपुरी गीतो का क्या योगदान है।---

 बहुत अच्छा प्रश्न पूछा है आपने पहले तो मै बताना चाहुगी की भोजपुरी आज वो पहले वाली भोजपुरी नही रह गयी है। जिसमें हर मौसम हर त्योहार और रस्म के लिए गीत होते थे आज भोजपुरी बस मैलोडी बनकर रह गयी है। फिर भी भोजपुरी गीतो को सुनने वाले पूरे देश में रहते है यहां तक कि मुबई में भी भोजपुरी के बहुत कद्रदान है संगीत और फिल्मो में भोजपुरी गीतो की अलग छाप है दीलीप साहब पर फिल्माया यह गाना नयन लड जयै तो कलेजवा में कसक हुइ बै करी, आज भी प्रसिद्व है इसके अलावा कई गीतो को लोग आज भी याद करते है 

भोजपुरी में किस तरह के गीतो को पसन्द किया जाता है।

आज भोजपुरी फिल्मो में गीतो का माहौल बहुत बिगड गया है। भोजुपुरी गीत अशीललता और द्विअर्थी शब्दा से भरें पडे है आज फिल्म और संगीत निर्माता इन्हे जनता की डिमाड बताकर अपनी जेबे भरने में लगे है।लेकिन सच्चाई इसके एक दम विपरीत है जनता तो एक दम भेली होती है आप जो दिखाते है वह वो देखना उनकी मजबूरी है सिंगर भी यह नही ध्यान रखते की राईटर ने क्या लिखा है वो अश्लील से अश्लील गीत भी गाकर चल देते है उनको पैसे से संतुष्टि मिल जाती लेकिन मै संस्कृति से जुडी हूूॅ। मै कभी ऐसे गाने नही पसन्द करती जिन्हे बैठ कर अपने परिवार के साथ न देख सकूॅ।

 बच्चो पर आज के संगीत का क्या असर पड रहा है

 कई बार मै हौरान रह जाती हॅ जब बच्चे मुझ से ऐसे गानो के विषय मे पूछते है जिसे सुनने के लिए वें बहुत छोटे है लेकिन वो गाने नेट और टीवी पर खुब दिख रहे है उनका पिक्चराइजेशन बेहद वल्गर है हम अपने बच्चो को उनकी पहुच से दूर नही रख सकते इसके लिए बस मै फिल्म और संगीत निर्माताओ से यही प्रार्थेना कर सकती हूॅ कि वो संस्कृति को भ्रष्ट करने वाली चीजे न दिखाये खाश तौर से भोजपुरी फिल्मों में इस बात का ध्यान रखने की सबसे अधिक आवश्यकता है।

आप बाॅलीवुड में पहचान बना रही है ऐसे में संगीत और शिक्षिका की  भूूिमका में कैस सामजस्य बैठाती है।

 मुझसे बहुत लोगो ने कहा कि जब आप एक गाने का इतना अच्छा अमाउंन्ट लेती है तो क्यू स्कूल में नौकरी करती है दरअसल मुझे शिक्षिका के रूप में संतोष मिलता है जिस स्कूल में मै पढाती हूॅ वहा सस्कारो पर बल दिया जाता है यही वजह है कि मै यहां अपनी मिटट्ी से जुडा महसूस करती हूॅ साथ समाज के निर्माण में छोटा ही सही कुछ सार्थंक योगदान दे पाती हूॅ

संगीत को लेकर आज काफी रियलिटी शो आ रहे है भोजपुरी में भी ऐसे मुकाबले आने लगे है आपको क्या लगता है कि ऐसे कार्यक्रम भोजपुरी संगीत के लिए कुछ योगदान दे पायेगे। 

निरूसंदेह आज मोहल्ला काफी बदल रहा है कंपटीशन का दौर है रियल्टी शोज से एक मौका तो मिलता ही है लेकिन इस्ट्रगल कम नही हो सकता मै कहती हूॅ कि लता ताई के जमाने में बाॅलीबुड में स्ट्रगल करना आसान था लेकिन आज युग में अपनी पहचान इमानदारी से बना पाना बेहद कठिन है मैने एक बार लता जी के सामने स्टेज पर परफोम किया था उन्होने ने कहा था कि ममता आपकी आवाज बहुत अच्छी है मै तुमसे यही कहना चाहती हॅॅू जब भी गीत गाना अच्छे शब्दो और बोलो को देखकर ही गाना नही हो सके तो अपने दिल के आवाज को अपनी खुद की सीडी में उतारना मै आज भी उनकें दी सीख का पालन कर रही हॅॅू इसके लिए चाहे मुझे कितनी ही फिल्मो को छोडनी पडे।

कुछ नौसीखिये डायरेक्टर आज भोजपुरी फिल्मो का निर्माण कर रहे है जिस के कारण फिल्मो का स्तर गिरया है और भोजपुरी सिनेमा का दुःशप्रचार हुआ है क्या आप इसे सही मानती है।।

बहुुत अच्छा सवाल है। बिल्कुल ठीक कहा आपने ब्लकि आपने मेरे दिल की बात पूछ ली है भोजपुरी में अच्छे डायरेक्टरों की कमी नही लेकिन आज भोजपुरी फिल्मो में कुछ नौसीखिये डायरेक्टर आ गए है मै एक फिल्मा का उदाहरण देना चाहुंगी डायरेक्टर का नाम नही लेना चाहूंगी फिल्म का नाम था प्रेम विरोधी नाम सुनकर लगेगा अच्छा विषय उठाया होगा डायरेक्टर ने इस फिल्म को मेरे भाई ने फाईनेंस किया था लेकिन स्टोरी उन्हे भी पता नही थी जब मै इसका गीत गाने स्टूडियों मे पहुंची तो वहा का माहौल और गीत के बोल देखकर मेरा मन उखड गया और मै विना गाये चली आई दूसरी ंिसगर ने हर लिमिटको को्रस करके वही गाना गाया और इसका फिल्मांकन बेहद वल्गर है मै ऐसे निर्माताओ से बस यही कहना चाहती हॅ कि भोजपुरी जो मिटट्ी है उसकी संस्कृति को गन्दा न करे।

नई कौन सी पिक्चर आ रही है---- 

मेेरी एक फिल्म आ रही है शादी के सात  दिन उसमें शादी से पूूर्व जो रस्मे होती है और जो लोकगीत गाये जाते उन्ही ण्को दिखाया गया है इसके अलावा फक्र मुंबई लाइव मे भी मैने गाने गाये है। 

welcome

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